मौलिक ज्ञान

आज हमारे समाज, जो अनेकों मतों और सम्प्रदाओं में बंट गया है, में जीवन के कुछ मूलभूत प्रश्नों के सम्बन्ध में कुछ भ्रान्तिपूर्ण विचार घर कर गए हुए हैं। जैसे दसवीं तक के विद्यार्थियों को भूगोल, इतिहास आदि विषयों की भी मौलिक जानकारीयां दी जाती है चाहे भविष्य में इन विषयों को चुनने की उनकी कोई योजना न हो। ठीक वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति को मानव – धर्म सम्बन्धित मौलिक जानकारियां होनी ही चाहिए।

 

हमारे जीवन के कुछ मूलभूत (मौलिक) प्रश्न 

1. हमारे जीवन का ध्येय क्या हैं ?

2. बुद्धि का क्या महत्त्व है?

    - क्या बुद्धियों के स्तर में अन्तर होने से र्इश्वर को जानने में बाधा उत्पन्न होती है?

    - तर्क क्या है?

    - किसी विषय को सही-सही जानने के लिए किन चीज़ों की आवश्यकता होती है?

    - तर्क और श्रद्धा क्या हैं व उनमें क्या सामंजस्य है?

    - तर्क अथवा विवेक के आधार कहे जाने वाले प्रत्यक्ष, अनुमान और शब्द प्रमाण क्या हैं?

3. जानने योग्य सबसे महत्त्वपूर्ण क्या है ?

    - इस संसार में कौन-कौन सी वस्तुओं व विषयों का ज्ञान जानने योग्य है?

4. आस्तिकता क्या है ?

    - र्इश्वर को जानना क्यों आवश्यक है?

    - ईश्वर की उपासना का तरीका व उसका लाभ क्या है ?

    - स्तुति, प्रार्थना, उपासना और पूजा का अर्थ क्या है ?

    - र्इश्वर का स्वरूप क्या है ?

    - र्इश्वर के मुख्य नाम कौन कौन से हैं ?

    - र्इश्वर के मुख्य गुण कौन कौन से हैं ?

    - जड़ पदार्थों की पूजा से क्या हानि है ?

    - ईश्वर क्या सब कुछ कर सकता है  ? ईश्वर क्या अन्याय भी कर सकता है ?

    - र्इश्वर के कर्म कौन कौन से हैं ?

    - र्इश्वर का स्वभाव क्या है ?

    - मोक्ष क्या है ?

5. हमारे शरीर की सभी क्रियाएं किस सत्ता के कारण से सम्भव होती हैं ?

6. क्यों जीवात्मा को विकलांग व रोगी शरीर में आना पड़ता है ?

7. क्या कोर्इ शक्ति जीवात्मा के ऊपर भी है ?

8. किसी विषय की सत्यता व असत्यता का अर्थ क्या है?

9. सत्य भाषण क्या है ?

    - न्याय और दया क्या हैं ?

10. विज्ञान क्या प्रयोगशालाओं तक ही सीमित है ? विज्ञान की क्या परिभाषा है ?

      - क्या आधुनिक विज्ञान भी र्इश्वर की सत्ता को मानता है ?

11. वेद क्या हैं ? इसके रचयिता कौन है ?  वेदों को पढ़ने की क्या आवश्यकता है ? हम क्यों माने कि वेदों का रचयिता र्इश्वर ही है ?

12. आर्य किसे कहते हैं?

      - आर्यों के क्या सिद्धान्त हैं ?

      - क्या आर्य कोई भी मनुष्य बन सकता है ?

13. अष्टांग योग क्या है व इस की भिन्न-भिन्न सीढि़यां कौन-कौन सी है ?

      - उपासना क्या है व योग में इसका क्या स्थान है ?

      - ज्ञान योग, कर्मयोग व भक्तियोग क्या हैं ?

14. ‘धर्म किसे कहते हैं ?

      - क्या धर्म और विज्ञान अलग- अलग हैं ?

      - धार्मिकता में किन तीन चीजों का समावेश होता है ?

      - अध्यात्मिकता और धार्मिकता में क्या अन्तर होता है ?

      - किसी व्यक्ति को किन लक्षणों के आधर पर धार्मिक कहा जा सकता है ?

      - क्या धर्म परिवर्तन सम्भव है ?

15. कर्म फल सिद्धान्त क्या है ? 

      - कर्मों का फल कौन देता है ?

      - प्रायश्चित क्या है ? क्या बुरे कर्मों के फल को नष्ट या कम किया जा सकता है ?

      - जब कर्मों का फल अवश्य ही मिलता है और उनसे कोर्इ बच नहीं सकता तो फिर र्इश्वरोपासना करने की क्या आवश्यकता है ?

      - संकटकाल में संकट से बचने के लिए की गयी प्रार्थना से क्या र्इश्वर विशेष ज्ञान-विज्ञान देता है ?

      - कर्मफल सिद्धान्त से सम्बंधित कुछ विशेष टिप्पणियां

16. यह सृष्टि कैसे बनी ?

      - क्या सृष्टि का रचयिता र्इश्वर ही है ?

      - रचना के लिए आवश्यक कौन-कौन सी वस्तुएं होती हैं ?

17. आर्ष ग्रन्थ किन्हें कहते है व वे कौन-कौन से है?

18. शिक्षा का अर्थ क्या है ?

19. गीता का सार क्या है ?

20. स्वतंत्रता’किसे कहते हैं व परतन्त्रता कब उचित होती है?

21. सामाजिक मर्यादाओं को पालना हर समाज के लिए क्यों आवश्यक है ?

22. संस्कृति और सभ्यता में क्या सम्बन्ध है ?

      - संक्षेप में भारतीय संस्कृति से हमारा क्या अभिप्राय है ?

23. क्या हमारे ग्रन्थों में प्रक्षेप हैं ?

24. भाग्य क्या है व इसका हमारे जीवन में क्या योग है ?

      - भविष्य को क्या जाना जा सकता है ?

      - भविष्य तो अटल है फिर उसकी जानकारी से हमे क्या लाभ हो सकता हैं ?

      - ज्योतिष क्या केवल भविष्य जानने के ज्ञान का नाम है ?

25. धन का क्या महत्व है व इसके क्या क्या उपयेाग है ?

      - क्या अधिक धन और स्मृद्धि की इच्छा करना गलत है ?

26. हमें झूठ नहीं बोलना चाहिए। हमें बेईमानी, धोखा नहीं करना चाहिए, हमें लालच नहीं करना चाहिए, लेकिन क्यों ?

27. सफलता मापने के लिए कौन सा माप दण्ड उचित है?

28. त्याग से हमारा क्या अभिप्राय है ?

      - ‘त्याग’और ‘तप’में क्या सम्बन्ध है ?

29. जब कोई व्यक्ति समयिक सामाजिक प्रवाह को रोक ही नहीं सकता तो उसी प्रवाह में बह जाने को अनुचित क्यों माना जाए ?

30. सन्ध्या क्या है ?

31. हवन क्या है ?

      - मन्त्र पाठ क्यों किया जाता है ?

32. देवता किन्हे कहते हैं ?

33. क्या पौधों में वास्तव में जीवन होता है ?

34. मांस व अण्डा क्यों अभक्ष्य हैं ?

 

     इन मूलभूत प्रश्नों के सम्बन्ध में अपनी गलत अवधारणायों के कारण व्यक्ति बहुत दुःख पाता है और यह समझ नहीं पाता कि धार्मिकता उसे सांसारिक कार्यो को करने में कैसे मदद कर सकता है। इन प्रश्नों का सही-सही उत्तर पता होने पर हम अपने समाज को मतों और सम्प्रदायों में बंटने देने के स्थान पर उसे एक-जुटकर पाएंगे। समाज को एकजुट करने का सत्य व अभ्रान्तिपूर्ण विचार ही एक मात्र साधन हैं।

     आज समाज में ऐसी कोई भी सामग्री उपलब्ध नहीं जो एक जगह इन सब प्रश्नों का उत्तर दे सके। मेरी इस कृति का उद्देश्य इन मूलभूत प्रश्नों के सम्बन्ध में सत्य पर आधारित जानकारियों को एक जगह एकत्र करना हैं।

अब प्रश्न उठता है कि इस की क्या निश्चितता (Surety) है कि दिए गए उत्तर, जो कि आज के समाज की मान्यतायों के विरुद्ध हैं, ही सही हैं। इसके उत्तर में कहा जा सकता है कि उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर में दिए गए सभी विचार एक दूसरे के पूरक (Supplement) हैं जिसे हम अपनी विश्लेषणात्मक। (Analytical) बुद्धि से जान सकते हैं।

 

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